बीनाः रिश्तेदार की दो सगे भाइयों ने की हत्याः जमानत के लिए जमीन की बंदी नहीं देने की बात को लेकर हुआ विवाद

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बीना के भानगढ़ थाना क्षेत्र के ढांड गांव में जमानत के लिए जमीन की बंदी नहीं देने की बात को लेकर दो सगे भाइयों ने अपने ही दूर के एक रिश्तेदार की चाकू मारकर हत्या कर दी।

जानकारी के अनुसार करतार पिता तुलाराम अहिरवार (38) बुधवार रात अपने घर पर बैठा हुआ था। तभी उसी गांव में रहने वाले उसके दूर के रिश्तेदार नीलेश अहिरवार, मौजी उर्फ मोहन अहिरवार आए और किसी मामले में जमानत के लिए जमीन की बंदी मांगने लगे।

तभी करतार ने जमीन की बंदी देने से मना कर दिया तो विवाद बढ़ गया। दोनों सगे भाई गाली गलौज करने लगे। जब करतार ने गाली गलौज करने से मना किया तो दोनों लोगों ने उसके साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। इसी दौरान दोनों भाइयों ने करतार पर चाकू से हमला कर दिया।

परिजन उसे गंभीर हालत में सिविल अस्पताल ले गए। लेकिन रास्ते में ही करतार ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव का पोस्टमॉर्टम कराया। पीएम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

भानगढ़ थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह भदोरिया ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।