बीना ।सर्व कल्याण वाला बजट है – सिरोठिया

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 बीना।भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री गौरव सीरोठिया ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत  की संकल्पना को पूर्ण करने वाला बजट है इस बजट में देश के गरीब, किसान, मातृशक्ति ,एवं नौजवान को सशक्त एवं सक्षम बनाने का प्रावधान किया गया है इस बजट में मध्य वर्गी लोगों का ध्यान रखते हुए ₹1200000 तक का सिलेव टैक्स फ्री किया गया है बजट में कृषि के क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में मेडिकल के क्षेत्र में एवं उद्योग के क्षेत्र में योजनाओं का समावेश किया गया है कृषि के क्षेत्र में प्रधानमंत्री धन धान्य योजना के माध्यम से देश के लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों को लोग लाभान्वित होंगे तो वही मध्य प्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने की दिशा में बजट में प्रावधान किया गया है जिससे निश्चित रूप से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व में  मध्य प्रदेश स्वर्णिम मध्य प्रदेश की दिशा मे आगे बढ़ेगा वास्तव में यह बजट सर्व कल्याण वाला बजट है

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।