भोपाल में चलती कचरा गाड़ी में लगी आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई हेल्पर की जान

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भोपाल में सड़क पर दौड़ती एक कचरा गाड़ी (मैजिक) में अचानक आग लग गई। इससे ड्राइवर और हेल्पर ने कूदकर अपनी जान बचाई। वहीं, आग बुझाने में हेल्पर के हाथ झुलस गए। आग से चंद मिनटों में ही मैजिक पूरी तरह से जल गई।

घटना वार्ड-44 के मेहता मार्केट के पास हुई। सुबह करीब 11.30 बजे कचरा गाड़ी दाना पानी इलाके की तरफ से मेहता मार्केट की ओर आ रही थी। तभी उसमें आग लग गई। ड्राइवर रोहित और हेल्पर आदित्य कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आग भीषण हो गई। जिससे दोनों ने गाड़ी रोकी और कूदकर जान बचाई।

जोन-12 के एएचओ रवि बाथम ने बताया कि गाड़ी खाली थी। ड्राइवर रोहित और हेल्पर आदित्य दाना-पानी से डीजल भरवाकर मेहता मार्केट की ओर आ रहे थे। तभी आग लगी। आग कैसे लगी? इसका पता नहीं चल सका है। हेल्पर आदित्य के हाथ झुलसे हैं। जिसे प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाया गया। वह अब ठीक है।

आग लगने की जानकारी मिलते ही मौके पर दमकल पहुंची और आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक आग से मैजिक पूरी तरह से जल चुकी थी। आग की लपटें 8 से 10 फीट तक ऊपर उठ गई थी।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।