रेलवे ठेकेदार की लापरवाही से 12 वर्षीय बच्ची गिरी गड्ढे में

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बच्ची को रेस्क्यू टीम ने चार घंटे बाद सुरक्षित निकाल लिया।

बीना में 12 साल की एक लड़की खेलते-खेलते मालखेड़ी रेलवे स्टेशन पर कार्यरत रेलवे ठेकेदार की लापरवाही की चलते पोल लगाने के लिए तैयार किए गए सीमेंटेड गड्ढे में गिर गई।

4 फीट गहरे इस बेस में लड़की का पैर फंस गया। जिसके चलते वह निकल नहीं पा रही थी।

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी की मदद से गड्ढे के पास में खुदाई कर करीब चार घंटे बाद बच्ची को निकाला जा सका।

घटना मालखेड़ी रेलवे जंक्शन पर गुरुवार शाम करीब 4 बजे की है। यहां रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है। ललितपुर से यहां मजदूरी करने आए सीतासरण कोरी की बेटी अंशिका (12) दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी वह गड्ढे में गिर गई। साथ खेल रहे बच्चों ने परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद डायल-100 को कॉल कर मदद मांगी गई।
घटना मालखेड़ी रेलवे जंक्शन पर गुरुवार शाम करीब 4 बजे की है। यहां रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है। ललितपुर से यहां मजदूरी करने आए सीतासरण कोरी की बेटी अंशिका (12) दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी वह गड्ढे में गिर गई। साथ खेल रहे बच्चों ने परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद डायल-100 को कॉल कर मदद मांगी गईबच्ची का पैर अंदर फंस गया जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रही थी। लगभग 4 घंटे की रेस्क्यू के बाद लड़की को किसी तरह से निकल गया और तत्काल सरकारी अस्पताल भेजा गया जहां लड़की का इलाज चल रहा है।
मालखेड़ी रेलवे स्टेशन पर रेलवे ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य चल रहे जा रहे हैं जिसमें काफी लापरवाही भी बढ़ती जा रही है गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया है जबकि आसपास यात्री भी वहां से निकलते हैं।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।