ललितपुर।कीर्तिशेष महेन्द्र सतभैयाजी की पुण्य स्मृति में नेत्र शिविर का हुआ आयोजन

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ललितपुर। दादा बाबूलाल सतभैया मेमोरियल सरस्वती ज्ञान मंदिर इंटर कॉलेज गौना नाराहट में नि:शुल्क नेत्र शिविर का आयोजन चंदा आई हॉस्पिटल द्वारा आयोजित किया गया था जिसमें करीब 200 मरीजों ने अपना नेत्र परीक्षण कराया था। इस दौरान 37 मरीज मोतियाबिंद के ऑपरेशन योग्य थे, जिन्हें निजी वाहनों द्वारा ललितपुर लाया गया था और 17 दिसम्बर 2024 को सभी का सफलता पूर्वक ऑपरेशन कराकर वापिस नाराहट भिजवा दिया गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डा.राजकुमार जैन ने सभी मरीजों एवं उनके परिजनों को इस भागदौड की जिंदगी में अपना खान पान सही रखना एवं बीमारियों से बचनें तथा स्वस्थ्य रहनें के लिए कुछ प्रमुख बातों से अवगत कराया। उक्त मौके पर अशोक रावत, डा.राजकुमार जैन, डा.अमित वर्मा, डा.नवदीप रावत, राजेन्द्र सिंह यादव, आनंद प्रकाश गुप्ता, अंकित सतभैया, शुभम जैन, नयन सतभैया, समकित जैन, देवप्रकाश गौतम, नागेश यादव, अमित नामदेव, रविदास, दयाराम, अमन तिवारी, मोहन कुशवाहा, अनिल कुशवाहा, पृथ्वीराज, विजय सेन, रिया जैन, अपेक्षा कटारे, अनामिका कटारे, रजनी, महेश राठौर, प्रशांत राठौर, रमेश यादव, सौरभ घोषी आदि मौजूद रहे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।