ललितपुर ।जाखलौन क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्यायें पहुंची शीर्ष पटल पर, जागी उम्मीद जिला पंचायत सदस्य अमर विश्वकर्मा ने विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा को सौंपे मांग पत्र

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

ललितपुर ।जाखलौन में सीएचसी व शहजाद नदी पर चैकडेम निर्माण की मांग
जिला पंचायत के वार्ड संख्या आठ से सदस्य निर्वाचित होने के बाद से अमर सिंह विश्वकर्मा दशकों से चली आ रहीं समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की दिशा में प्रयासरत हैं। आदिवासी समुदाय का बाहुल्य क्षेत्र कहलाने वाले जाखलौन से लगे दो दर्जन से अधिक छोटे-बड़े गांवों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और आवागमन के लिए शहजाद नदी पर पुल और सिंचाई के लिए चैकडेम निर्माण की मांग की गयी है। जनहितैषी इन कार्यों को शीघ्र कराने के लिए जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह विश्वकर्मा ने विधान परिषद सदस्य/वाराणसी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा को उनके आवास पहुंच कर मांग पत्र सौंपे हैं। सीधे आमजन से जुड़े मुद्दों को लेकर विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा ने जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह विश्वकर्मा के कार्यों की प्रशंसा करते हुये उक्त मांग पत्र डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को अपने लैटर में संलग्न करके भेजे हैं। अब क्षेत्र की जनता में उम्मींद जागी है कि उनके ही बीच रहने वाला जमीन से जुड़ा नेता अमर सिंह विश्वकर्मा उनकी दशकों पुरानी समस्याओं को शीर्ष पटल पर लेकर पहुंचा है, जिससे यह समस्याएं समय रहते दूर हो सकेंगी।
जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह विश्वकर्मा ने विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा को सौंपे मांग पत्र में बताया कि मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर कस्बा जाखलौन और उसके आसपास करीब दो दर्जन छोटे-बड़े गांव हैं, जिनमें हजारों की संख्या में लोग निवासरत हैं। बताया कि दशकों से यहां आमजन के लिए उपचार के लिए कोई अस्पताल नहीं है। सहरिया आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश लोग मजदूरी, दिहाड़ी पर ही आश्रित हैं, लेकिन उपचार के अभाव में सैकड़ों लोग बीमारी के कारण घटित घटनाओं में काल-कलवित हो गये। इस सम्बन्ध में जाखलौन विकास समिति एवं ग्रामीणों ने विगत दस वर्षों से जाखलौन में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना के लिए मांग की थी, जिस पर अस्पताल निर्माण के लिए गांव में जगह मिल चुकी है, परन्तु अस्पताल का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने शीघ्र ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जाखलौन में स्थापित कराये जाने की मांग उठायी।
इसी प्रकार अमर विश्वकर्मा घुटारी ने दूसरे मांग पत्र में अवगत कराया कि जाखलौन क्षेत्र में सिंचाई व आवागमन के लिए घुटारी व मैरतीकलां के मध्य से निकली शहजाद नदी पर चैकडेम/रपटा के निर्माण कराये जाने की मांग उठायी। उन्होंने बताया कि चैकडेम या रपटा निर्माण से घुटारी, निवाई, ऐरावनी, निवाहो, कुमरौला, उत्तमधाना, मैरतीकलां, बेसरा, पढ़ौरिया, बम्हौरीकलां, ऐरा व आलापुर सहित दर्जनों गांव के लोगों को आवागमन और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इसके अलावा यहां के लोग सीधे मुख्यालय से जुड़ सकेंगे। यह भी बताया कि इस सम्बन्ध में वर्तमान सांसद अनुराग शर्मा के पत्र से भी मांग उठायी गयी है।
आमजन से सीधे तौर पर जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के लिए विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक व जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पत्र प्रेषित किया है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल को भी दिया था पत्र
जाखलौन क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह विश्वकर्मा घुटारी ने बताया कि जाखलौन में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना कराये जाने के लिए विगत 2 दिसम्बर को ललितपुर पहुंची केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल को उनके द्वारा सर्किट हाऊस में पत्र देकर मांग उठायी गयी थी। जिस पर केन्द्रीय मंत्री द्वारा भी सीएचसी निर्माण के लिए आश्वासन दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।