बीना। वैसे तो राजशाही और नौकरशाही भाजपा के शासन का एक अंग बन चुकी है जहां नेताओं को और अधिकारियों को कुछ भी करने की छूट है। प्रतिवर्ष लाखों रुपए का वेतन बीना में ऐसे कर्मचारियों के नाम पर बीना की ही संस्थाओं से निकल जाता है जो जमीनी धरातल पर बीना में काम ही नहीं करते। या तो वे किसी नेता, जनप्रतिनिधि या राजनैतिक पदाधिकारी के निवास पर कार्यरत होते हैं या फिर किसी बड़े सरकारी अधिकारी के घर पर सब्जी लाने और बच्चों को खिलाने का काम करते हैं। इस मामले में बीना नगरपालिका के भी कई कर्मचारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के यहां लंबे समय कार्यरत रहे हैं और अभी भी काम कर रहे हैं।
हजारों रुपए का वेतन निकल रहा है एक्सीलेंस स्कूल से
जबकि इन कर्मचारियों का वेतन नगरपालिका से भुगतान किया जाता है। इसके लिए न तो कोई नियम है और न ही कायदा। इसी तरह बीते दिनों उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य सीएम मंसूरी की पत्रकारवार्ता के बाद एक और मामले का खुलासा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार बीना उत्कृष्टता विद्यालय में जहां प्यून और अन्य कर्मचारियों का अभाव है वहीं दूसरी ओर उत्कृष्टता विद्यालय के नाम पर पदस्थ दो कर्मचारी जिला शिक्षाधिकारी सागर और कमिश्नर सागर के यहां अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। बताया गया है कि आरती शर्मा जो कि उत्कृष्टता विद्यालय बीना में कार्यरत हैं वे वर्तमान में जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में नौकरी कर रही हैं जबकि उनका वेतन बीना उत्कृष्टता विद्यालय से निकाला जा रहा है वहीं कैलाश रैकवार नाम के कर्मचारी सागर कमिश्नर कार्यालय में अटैच हैं। सवाल इस बात का है कि जब उत्कृष्टता विद्यालय में ही निम्र श्रेणी कर्मचारियों की कमी लगातार बनी हुई है तो फिर ऐसे में यहां के कर्मचारियों को सागर में क्यों रखा गया है।
प्राचार्य की अभद्रता के विरोध में विद्यार्थियों ने सौंपा था ज्ञापन

प्राचार्य की अभद्रता के विरुद्ध छात्रों ने सौंपा था ज्ञापन
बीना। शासकीय उत्कृष्ट स्कूल में अयोध्या में भगवान श्रीराम के स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर कुछ युवा दीपक रखने के लिए गए थे, जहां पर प्राचार्य द्वारा उनसे अभद्रता करने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत जब युवाओं ने सीएम हेल्पलाइन पर की, तो प्राचार्य सीएम मंसूरी ने उन्हें स्कूल बुलाकर सीएम हेल्पलाइन बंद कराने की धमकी दी

