सोयाबीन का समर्थन मूल्य 8 हजार रुपए क्विंटल किए जाने की मांग

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

बीना (टीएमई न्यूज)। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 8000 रुपए क्विंटल करने की मांग किसान जोरशोर से उठा रहे हैं और पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष संदीप ठाकुर ने बताया कि सोयाबीन के भाव 12 साल पहले के स्तर पर आ चुके हैं, जो करीब 4000 रुपए प्रति क्विंटल हैं, जबकि लागत में ढ़ाई गुना से अधिक का इजाफा हो चुका है। इतने कम दामों में किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। संभागीय अध्यक्ष सीताराम ठाकुर ने बताया मप्र सरकार को अभी हाल ही में सोयाबीन उत्पादन में प्रथम स्थान के लिए पुरस्कार मिला है, जो किसानों के कारण मिला है। सरकार निजी कंपनियों को लाभ देने के लिए लगातार पाम आयल का आयात करती है, जिससे सोयाबीन के भाव नहीं बढ़ पाते हैं। सरकार को तत्काल पाम आयल के आयात पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही सोयाबीन 8000 रुपए क्विंटल खरीदा जाना चाहिए। यदि शीघ्र मांग पूरी नहीं हुई, तो किसान भोपाल मार्च का ऐलान कर सकते हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष रामगोपाल, तहसील अध्यक्ष साहब सिंह, राघवेन्द्र सिंह आदि किसान उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।