होटल मेपल और परिक्रमा रेस्तरां: अरविंद अग्रवाल और आयुष अग्रवाल की मेहनत की गूंज

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भोपाल /यह कहानी है अरविंद अग्रवाल साहब और उनके बेटे आयुष अग्रवाल की, जिन्होंने अपनी दूरदृष्टि, मेहनत और जुनून से मध्य प्रदेश के आतिथ्य और पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने न केवल नर्मदापुरम रोड पर स्थित होटल मेपल को खड़ा किया, बल्कि इसके साथ “परिक्रमा”, मध्य प्रदेश का पहला घूमने वाला रेस्तरां भी बनाया, जो आज हर किसी के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

*शुरुआत: पिता-पुत्र की अनोखी साझेदारी*

अरविंद अग्रवाल साहब हमेशा से एक दूरदर्शी इंसान रहे हैं। उनका सपना था कि वे मध्य प्रदेश में ऐसा कुछ बनाएं, जो सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक पहचान बन जाए। दूसरी ओर, आयुष अग्रवाल, जो युवा और ऊर्जा से भरपूर थे, अपने पिता के सपनों को नई सोच और तकनीक के साथ साकार करना चाहते थे।

दोनों ने मिलकर एक ऐसी जगह बनाने का सपना देखा, जो न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण हो, बल्कि लोगों को एक यादगार अनुभव भी प्रदान करे। इस सपने को साकार करने की दिशा में उन्होंने होटल मेपल और परिक्रमा रेस्तरां की योजना बनाई।

*होटल मेपल: नर्मदापुरम रोड की शान*

होटल मेपल, नर्मदापुरम रोड पर स्थित, सिर्फ एक होटल नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आधुनिकता का मेल है। अरविंद साहब ने होटल के हर पहलू पर ध्यान दिया, जिससे यह स्थान अपने मेहमानों के लिए घर जैसा आरामदायक और अनोखा अनुभव बन सके।

*होटल मेपल की खासियतें:*

1. आधुनिक डिज़ाइन: होटल को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह प्राकृतिक सुंदरता के बीच एक आधुनिक अनुभव प्रदान करता है।


2. सांस्कृतिक झलक: हर कमरे और सजावट में मध्य प्रदेश की लोक कला और परंपराओं की झलक दिखाई देती है।


3. उत्तम सेवा: यहां हर मेहमान का स्वागत एक विशेष अनुभव के साथ किया जाता है, जिससे वे खुद को खास महसूस करते हैं।


4. स्थानीय स्वाद: होटल के रेस्तरां में परोसा जाने वाला भोजन न केवल ताजा और स्वादिष्ट है, बल्कि यह स्थानीय व्यंजनों को भी बढ़ावा देता है।



परिक्रमा: मध्य प्रदेश का पहला घूमने वाला रेस्तरां

होटल मेपल की सफलता के बाद, अरविंद और आयुष ने “परिक्रमा रेस्तरां” का सपना देखा। यह रेस्तरां होटल मेपल का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया। परिक्रमा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, एक ऐसा रेस्तरां है, जो लगातार घूमता रहता है।

परिक्रमा रेस्तरां की अनोखी बातें:

1. 360 डिग्री घूमने वाला डिज़ाइन: यह रेस्तरां धीरे-धीरे घूमता है, जिससे मेहमान न केवल स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हैं, बल्कि 360 डिग्री का मनोरम दृश्य भी देखते हैं। चाहे वह सूरज की किरणों का खेल हो या रात में चमकते सितारे, परिक्रमा हर पल को खास बना देता है।


2. तकनीकी चमत्कार: परिक्रमा को उच्च-स्तरीय तकनीक का उपयोग करके डिज़ाइन किया गया है, जो इसे सुरक्षित और सहज रूप से घूमने में सक्षम बनाती है।


3. वातावरण का अद्भुत अनुभव: रेस्तरां के अंदर बैठते ही मेहमानों को ऐसा महसूस होता है, जैसे वे प्रकृति और आधुनिकता के संगम का हिस्सा बन गए हों। खिड़की से दिखने वाले दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।


4. स्वाद का जादू: यहां परोसे जाने वाले व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि वे स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्वादों का अद्भुत मिश्रण हैं।



मेहनत रंग लाई

अरविंद साहब के अनुभव और आयुष की नई सोच ने परिक्रमा को हकीकत में बदल दिया। इस रेस्तरां ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया। यह मध्य प्रदेश का पहला और अनोखा घूमने वाला रेस्तरां बन गया, जो हर किसी के दिल को छू लेता है।

पिता-पुत्र की साझेदारी का जादू

अरविंद अग्रवाल साहब और आयुष अग्रवाल की यह साझेदारी केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। यह साझेदारी उनके मजबूत रिश्ते, आपसी सम्मान और सहयोग का प्रमाण है। अरविंद साहब ने अपने बेटे को सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी, जबकि आयुष ने अपने पिता के अनुभव का सही दिशा में उपयोग कर आधुनिक तकनीक और सोच को जोड़ा।

आज का होटल मेपल और परिक्रमा
आज होटल मेपल और परिक्रमा मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखते हैं। यह स्थान न केवल अपने मेहमानों को शानदार आतिथ्य प्रदान करता है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को भी बढ़ावा देता है।
निष्कर्ष
यह कहानी हमें सिखाती है कि जब अनुभव और नई सोच का मेल होता है, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। अरविंद अग्रवाल और आयुष अग्रवाल की मेहनत, दूरदृष्टि और समर्पण ने न केवल एक होटल और रेस्तरां बनाया, बल्कि मध्य प्रदेश को एक नई पहचान दी।

“होटल मेपल और परिक्रमा” आज केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उन सपनों का प्रतीक हैं, जिन्हें जुनून और मेहनत से पूरा किया गया। यह पिता-पुत्र की जोड़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि जब सपने को हकीकत में बदलने की ठान लो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।