20 वर्षीय महिला ने धारदार हथियार से की पति की हत्या

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बीना/सागर जिले के धनौरा गांव में आपसी विवाद में एक महिला ने अपने पति की धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी। वारदात मंगलवार देर रात हुई। बुधवार सुबह युवक का भाई जब उनके घर पहुंचा तो घटना का पता चला। इसके बाद परिजन उसे सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

मायके जाने पर हुआ था पति से विवाद

जानकारी के अनुसार बीना से 5 किलोमीटर दूर धनौरा गांव में मंगलवार रात मायके जाने से रोकने पर हेमलता उर्फ अंगूरी बाई (20) ने अपने पती दयाराम पिता प्रेम नारायण कुशवाहा (30) पर सोते समय धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी। दयाराम के भाई दया प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि जब वह सुबह उठा तो भाई के घर के दरवाजे की बाहर से कुंडी लगी हुई थी। जब घर के अंदर जाकर देखा तो भाई खून से लथपथ पड़ा था।

एफएसएल टीम द्वारा जांच के बाद सबका पोस्टमार्टम किया गया है मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है पुलिस जांच कर रही है

साधना न्यूज एमपी सीजी पर महिला द्वारा पति की हत्या की प्रमुखता से प्रसारित खबर
https://youtu.be/vRgwwui54C4?si=ZokE3AozPP5HMIi0

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।