भिंड । ईओडब्ल्यू द्वारा झूठी FIR दर्ज करवाकर विपक्ष की आबाज को दबाने का भाजपा नेताओं ने किया प्रयास : हेमंत कटारे*

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भिंड ।कांग्रेस उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और उनके परिवार पर ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज की गई। FIR को लेकर उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के द्वारा  ईओडब्ल्यू पर दबाव बनाकर इस तरह के झूठे अपराध विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए दर्ज करवाए जाते हैं। उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने यह भी कहा कि जब वह विधायक बने थे तब भी उन पर 6 अपराध दर्ज करवाए गए थे।  उपनेता प्रतिपक्ष के द्वारा यह भी बताया जा रहा है।कि यह मामला 2004 का है। उपनेता प्रतिपक्ष ने अपने पिता स्वर्गीय सत्यदेव कटारे का जिक्र करते हुए कहा कि पिताजी के द्वारा व्यापम कांड को लेकर पूरी सरकार को घेरने का काम किया था। उसमें कई भाजपा के नेता जेल गए और आगे भी भविष्य में जाएंगे।उस समय पिता जी नेता प्रतिपक्ष थे।तब 2015 में एक PE भी पंजीबद्ध की गई थी। लेकिन पिताजी के स्वर्गवास होने के उपरांत सब एजेंसियों ने जांच रोक दी।लेकिन अब जैसे ही मैं उप नेता प्रतिपक्ष बना और सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिया तो मैं अचानक से आरोपी बन गया। लेकिन इस पूरे मामले पर उपनेत प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा है कि उनको इतना लिहाज तो करना चाहिए कि राजनीति आपस में ही रखें। घर की महिला और बच्चों को बीच में ना घसीटे।  विधायक हेमन्त कटारे ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा कि में इस मामले को न्यायालय के लेकर जाऊंगा और मुझे न्यायालय पर पूर्ण भरोसा है बो पुनः इन आरोपों को झूठा सिद्ध करेगी। आखिर ईओडब्ल्यू को इस मामले की याद 21 साल बाद क्यों आई उपनेता प्रतिपक्ष बनने से पहले इस मामले क्या हेमंत कटारे दोषी नही थे। यह एफआईआर पूर्णता विपक्ष की आबाज को दबाने के लिए एक साजिश के तहत की गई है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।