कैप्टन विजयकांत के अंतिम दर्शन में थलापति विजय पर हुआ हमला, आदमी ने फेंकी चप्पल

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विजयकांत के अंतिम यात्रा मे थलापति विजय पर फेंकी चप्पल

अभिनेता-राजनेता विजयकांत का शुक्रवार को चेन्नई में अंतिम दर्शन रखा गया। जहां अंतिम संस्कार में थलपति विजय पर हमला किया गया। तमिल अभिनेता अंतिम संस्कार में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए शामिल हुए। हालांकि, शोक मनाने वालों की भीड़ में से किसी आदमी ने ‘लीयो’ एक्टर थलापति विजय पर चप्पल फेंकी। विजयकांत का गुरुवार 28 दिसंबर को निधन हो गया। 71 वर्षीय अभिनेता से राजनेता बने विजयकांत वेंटिलेटरी सपोर्ट पर थे। अभिनेता से राजनीतिक नेता बने, जिन्होंने देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (DMDK) पार्टी की भी स्थापना की। कैप्टन विजयकांत को MIOT इंटरनेशनल में भर्ती कराया गया था।

थलापति विजय पर फेंकी चप्पल

अंतिम संस्कार चेन्नई में हुआ जिसमें कई तमिल सितारे शामिल हुए। विजय अंतिम संस्कार में मौजूद सितारों में से एक थे। सोशल मीडिया एक्स यानी ट्विटर पर थलापति विजय का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें विजय को अंतिम सम्मान देने के लिए भीड़ के बीच से गुजरते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने विजयकांत के परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदना व्यक्त की। जैसे ही वह बाहर निकले अभिनेता को बेरहमी से घेर लिया गया जबकि पुलिस उन्हें वहां से निकलने में मदद कर रही थी। इस बीच ही कैप्टन विजयकांत के अंतिम दर्शन में थलापति विजय पर एक आदमी ने चप्पल फेंक दी।

यहां देखें वीडियो-

थलापति विजय-कैप्टन विजयकांत

लियो अभिनेता थलापति विजय और अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत का एक-दूसरे से बहुत अच्छा बॉन्ड है। यहां तक कि उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म ‘सिंदूर पांडे’ में उनके साथ स्क्रीन स्पेस भी शेयर किया था। इस घटना से दोनों अभिनेताओं के प्रशंसकों को जबरदस्त झटका लगा है। बहरहाल अभिनेता ने अपना संयम बनाए रखा और घटना पर कोई प्रतिक्रिया दिए बिना वहां से चले गए।

फिल्म लियो के बारे में 

इस फिल्म में विजय के साथ संजय दत्त, तृषा कृष्णन, अर्जुन समेत कई सेलेब्स अहम किरदार निभाते नजर आए हैं। बता दें कि विजय की ये फिल्म 250-300 करोड़ के बजट में बनी है। फिल्म को लोकेश कनागराज ने डायरेक्ट किया है और सेवन स्क्रीन स्टूडियो ने प्रोड्यूस किया है। वहीं ‘लियो’ के डिजिटल राइट्स नेटफ्लिक्स के पास है। ‘लियो’ को पांच भाषाओं हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज किया गया है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।