तेंदूखेड़ा । सिद्धचक्र महामंडल विधान छठवें दिन 256 अर्घ्य समर्पित कर की गई सिद्धों की महार्चना 

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तेंदूखेड़ा – जैन मंदिर प्रांगण श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ चल रहा है। विधान के मुख्य यजमान पुण्यार्जक डा प्रकाश जैन  वरियाबाला परिवार है। प्रतिदिन प्रात: 6.30 बजे से जिनेन्द्र देव का अभिषेक, व्यक्ति परिवार समाज, राष्ट्र एवं सम्पूर्ण विश्व के प्राणिमात्र  के मंगल कल्याण एवं सुख शांति की कामना के साथ शांतिधारा सम्पन्न की जाती है तदुपरांत नित्यमह पूजन एवं विधान भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है वहीं रात्रि में 7.30 बजे से महा आरती, प्रवचन एवं सास्कृतिक कार्यक्रम जारी है, विधान के षष्ठम दिन 256 अर्घ्य समर्पित कर लोक के अग्रभाग में विराजमान सिद्धों की महार्चना की गई। आज चैत्र शक्ल पंचमी की शुभ तिथि में सम्मेदशिखरजी से निर्वाण को प्राप्त करने वाले तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी को विधान में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू समर्पित करके भक्तिभाव से उनका निर्वाण कल्याणक मनाया।आज विधान में बताया गया कि सिद्ध पद को प्राप्त सिद्ध परमात्माओं ने ज्ञान को ढकने वाले ज्ञानावरणी कर्म को नष्ट करके अनंत ज्ञान को प्राप्त किया, दर्शन गुण को ढकने वाले दर्शनावरणी कर्म को नष्ट करके अनंत दर्शन गुण को प्राप्त किया, मोहनीय कर्म का नाश करके सम्यक् श्रद्धा गुण प्रकट किया, अंतराय कर्म का नाश करके अनंत शक्ति प्रकटी, वेदनीय  कर्म का नाश करके अव्यावाध सुख प्राप्त किया, आयु कर्म का नाश करके अवगाहनत्व गुण प्रकट किया नाम कर्म का नाश करके सूक्ष्मत्व गुण प्रकट किया, गोत्र कर्म  को नष्ट करके अगुरुलघुत्व गुण प्राप्त किया और संसार के आवागमन से मुक्त हो गये परम विशुद्ध अवस्था को प्राप्त कर लिया है। ऐसे सभी सिद्ध भगवंतों को वारंवार नमस्कार हैं।
पं कमल कुमार शास्त्रीसंवाददाता अमित खरे तेंदूखेड़ा

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