बीना। भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को अब मीडिया और प्रेस से दूरियां बनाने के संकेत शायद मिल चुके हैं यही कारण है कि बीना में भाजपा के सरकारी कार्यक्रमों सहित राजनैतिक कार्यक्रमों की पूर्व सूचना अब प्रेस और मीडियाकर्मियों को मिलना बंद हो गई है। जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस मुक्त अभियान में जुटी हुई है उसी तरह बीना भाजपा भी प्रेस और मीडिया मुक्त भाजपा का अभियान बीना में छेड़े हुए दिखाई देती है। बीना भाजपा में ग्रामीण, नगर, खिमलासा, भानगढ़ और मंडीबामोरा ये 5 मंडल हैं। इन सभी मंडलों में प्रवक्ता और प्रचार मंत्रियों की नियुक्तियां भी की गई हैं किंतु बीना भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर पत्रकारों को न तो किसी प्रकार की जानकारी देने के लिए कोई ग्रुप बनाया हुआ है और न ही व्यक्तिगत रूप से कोई जानकारी दी जाती है।
पीएम के कार्यक्रम की नहीं दी सूचना –
बीते दिनों बीना रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक स्टेशन एक उत्पाद के साथ जनऔषधि दुकानों का वर्चुअल उद्घाटन किया। किंतु इस कार्यक्रम से मीडिया और पत्रकारों को रेलवे के अधिकारियों सहित भाजपा नेताओं ने दूर रखा। कुछ पत्रकार और मीडियाकर्मी भले ही इन कार्यक्रमों में पहुंच जाते हैं और इन्हीं के माध्यम से खबरों का प्रसारण हो जाता है। जबकि विधिवत् रूप से पत्रकारों को न तो कार्यक्रमों की पूर्व सूचना दी जाती है और न ही आमंत्रण।
भाजपा प्रत्याशी वानखेड़े का करा दिया गुपचुप दौरा –
इसी तरह भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी लता वानखेड़े मंगलवार को बीना आईं जहां एक भाजपा कार्यकर्ता के पोस्टरों के माध्यम से यह पता चला कि लता वानखेड़े बीना आ रही हैं। प्रेस और मीडिया को किसी भी प्रकार की जानकारी श्रीमति वानखेड़े के आगमन की नहीं दी गई और चुपके-चुपके भाजपा के बड़े नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों से अपना स्वागत कराकर वानखेड़े वापस सागर चली गईं। इस दौरान उन्हें और भी कई कार्यकर्ताओं के यहां पहुंचना था किंतु प्राप्त जानकारी के अनुसार वे कार्यकर्ता इंतजार करते-करते थक गए और अंतत: उन्हें श्रीमति वानखेड़े से मिले बिना ही लौटना पड़ा।
कहीं विरोध में प्रश्न न पूछ ले पत्रकार –
वानखेड़े का यह गुपचुप दौरा प्रेस और मीडिया से क्यों छुपाया गया इस संदर्भ में स्थानीय एक बड़े भाजपा नेता का कहना है कि वानखेड़े का टिकट कार्यकर्ताओं की मंशानुरूप नहीं दिया गया है और उन्हें अपनी जाति को लेकर हर जगह सफाई देना पड़ रही है लिहाजा प्रेस और मीडिया उनसे कोई सवाल न करे इसलिए उन्हें चुपके-चुपके बुलाकर गुपचुप तरीके से वापस लौटा दिया गया। खबर तो यह भी है कि कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने श्रीमति वानखेड़े को एक ही पक्ष के नेताओं और अपने विरोधियों से संपर्क करने के कारण खरी खोटी भी सुना दी। ऐसे में लोकसभा चुनाव में लता वानखेड़े यदि गुपचुप और बिना प्रेस मीडिया से मिले अपना प्रचार करेंगी तो मोदी का जादू भी उन्हें नहीं जिता पाएगा।


