बीना भाजपा बना रही प्रेस और मीडिया से लगातार दूरियां भाजपा लोकसभा प्रत्याशी वानखेड़े का गुपचुप कराया दौरा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं


बीना। भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को अब मीडिया और प्रेस से दूरियां बनाने के संकेत शायद मिल चुके हैं यही कारण है कि बीना में भाजपा के सरकारी कार्यक्रमों सहित राजनैतिक कार्यक्रमों की पूर्व सूचना अब प्रेस और मीडियाकर्मियों को मिलना बंद हो गई है। जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस मुक्त अभियान में जुटी हुई है उसी तरह बीना भाजपा भी प्रेस और मीडिया मुक्त भाजपा का अभियान बीना में छेड़े हुए दिखाई देती है। बीना भाजपा में ग्रामीण, नगर, खिमलासा, भानगढ़ और मंडीबामोरा ये 5 मंडल हैं। इन सभी मंडलों में प्रवक्ता और प्रचार मंत्रियों की नियुक्तियां भी की गई हैं किंतु बीना भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर पत्रकारों को न तो किसी प्रकार की जानकारी देने के लिए कोई ग्रुप बनाया हुआ है और न ही व्यक्तिगत रूप से कोई जानकारी दी जाती है।
पीएम के कार्यक्रम की नहीं दी सूचना –
बीते दिनों बीना रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक स्टेशन एक उत्पाद के साथ जनऔषधि दुकानों का वर्चुअल उद्घाटन किया। किंतु इस कार्यक्रम से मीडिया और पत्रकारों को रेलवे के अधिकारियों सहित भाजपा नेताओं ने दूर रखा। कुछ पत्रकार और मीडियाकर्मी भले ही इन कार्यक्रमों में पहुंच जाते हैं और इन्हीं के माध्यम से खबरों का प्रसारण हो जाता है। जबकि विधिवत् रूप से पत्रकारों को न तो कार्यक्रमों की पूर्व सूचना दी जाती है और न ही आमंत्रण।
भाजपा प्रत्याशी वानखेड़े का करा दिया गुपचुप दौरा –
इसी तरह भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी लता वानखेड़े मंगलवार को बीना आईं जहां एक भाजपा कार्यकर्ता के पोस्टरों के माध्यम से यह पता चला कि लता वानखेड़े बीना आ रही हैं। प्रेस और मीडिया को किसी भी प्रकार की जानकारी श्रीमति वानखेड़े के आगमन की नहीं दी गई और चुपके-चुपके भाजपा के बड़े नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों से अपना स्वागत कराकर वानखेड़े वापस सागर चली गईं। इस दौरान उन्हें और भी कई कार्यकर्ताओं के यहां पहुंचना था किंतु प्राप्त जानकारी के अनुसार वे कार्यकर्ता इंतजार करते-करते थक गए और अंतत: उन्हें श्रीमति वानखेड़े से मिले बिना ही लौटना पड़ा।
कहीं विरोध में प्रश्न न पूछ ले पत्रकार  –
वानखेड़े का यह गुपचुप दौरा प्रेस और मीडिया से क्यों छुपाया गया इस संदर्भ में स्थानीय एक बड़े भाजपा नेता का कहना है कि वानखेड़े का टिकट कार्यकर्ताओं की मंशानुरूप नहीं दिया गया है और उन्हें अपनी जाति को लेकर हर जगह सफाई देना पड़ रही है लिहाजा प्रेस और मीडिया उनसे कोई सवाल न करे इसलिए उन्हें चुपके-चुपके बुलाकर गुपचुप तरीके से वापस लौटा दिया गया। खबर तो यह भी है कि कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने श्रीमति वानखेड़े को एक ही पक्ष के नेताओं और अपने विरोधियों से संपर्क करने के कारण खरी खोटी भी सुना दी। ऐसे में लोकसभा चुनाव में लता वानखेड़े यदि गुपचुप और बिना प्रेस मीडिया से मिले अपना प्रचार करेंगी तो मोदी का जादू भी उन्हें नहीं जिता पाएगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।