बीना ।शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बीना में अल्पावधि रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम

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बीना । अन्तर्गत श्री सुजीत क्लाडियस पत्रकार एवं समाज सेवी ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया! उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपना मूल्यांकन स्वयं करते हुए अपना लक्ष्य निर्धारित करें।उन्होंने नौकरी एवं व्यवसाय के बारे में जानकारी दी। व्यवसायों के प्रकार एवं इतिहास पर प्रकाश डाला ।उन्होंने कहा कि युवा अपनी कमजोरी दूर करते हुए अपनी सोच को बदलकर समय के साथ चलने की आदत विकसित करें।उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि अपने व्यक्तित्व को विकसित करें! इस अवसर पर प्राचार्य डॉ एम एल सोनी  ने कहा कि विद्यार्थी इस तरह के कार्यक्रमों मे प्रतिभागिता कर अपने व्यक्तित्व का विकास करें। वर्तमान युग कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी का युग है! इस प्रशिक्षण के द्वारा आप आई टी की बहुत सारी बातें सीख सकते हैँ। स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं प्रशिक्षण प्रभारी मोहम्मद रफीक शेख ने बताया कि इस प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को रिज्यूम बनाना ,मेल आईडी बनाना, ए बी सी आई डी बनाना ,चैट जीपीटी यूज़ करना ,पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन, इफेक्टिव कम्यूनिकेशन इत्यादि सिखाया गया।साथ ही कंप्यूटर पर विद्यार्थियों से प्रायोगिक कार्य भी कराया गया।आभार छात्रा जय शिखा वर्मा ने व्यक्त किया।  इस अवसर पर दीपक शर्मा , डॉ नीलम सिंह, डॉक्टर वंदना चौबे,  डॉ क्रांति मिश्रा ,डॉ राज मोहम्मद एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे! !

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।