भोपाल में 3 बेटियों के साथ मां ने लगाई फांसी

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भोपाल में मां ने 3 बेटियों को फांसी पर लटकाने के बाद खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला और 2 बेटियों की मौत हो गई। ढाई साल की एक बेटी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महिला के भाई ने बेटे को जन्म नहीं देने के कारण प्रताड़ना के आरोप ससुराल वालों पर लगाए हैं। हालांकि, शुरुआती जानकारी मर्डर की आई थी।

घटना भोपाल से 35 किमी दूर गुनगा थाना क्षेत्र के रोडिया गांव की है। मामला मंगलवार दोपहर को सामने आया। तीनों के शव हमीदिया अस्पताल भेजे गए हैं। महिला का नाम संगीता यादव उम्र 28 साल, बेटी आराध्या 5 साल और श्रृष्टि ढाई साल की है।

गुनगा थाना प्रभारी अरुण शर्मा ने बताया कि रायसेन जिले के संग्रामपुर निवासी संगीता की शादी 2018 में भोपाल के रोडिया गांव निवासी रजत यादव से हुई थी। शुरुआती जांच में महिला द्वारा सुसाइड और इससे पहले 3 बच्चियों की हत्या किए जाने के संकेत घटनास्थल की जांच के दौरान मिले हैं। महिला ने बेटियों को फांसी पर लटकाने के बाद सुसाइड किया है। इससे पहले उसने पांच मैसेज ननद मोना को भेजे हैं। पहला मैसेज सोमवार रात 12.24 पर और बाकी के चार 12.55 पर भेजा है। इसके बाद यही मैसेज अपने भाई नीरज को भेजे हैं।

भाई का आरोप बेटा नहीं होने पर कर रहे थे प्रताड़ित संगीता के भाई नीरज यादव ने बहन के सुसराल पक्ष पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। नीरज ने बताया कि तीनों के शव सबसे पहले संगीता की ननद ने देखे थे। उन्होंने सुबह करीब 6 बजे शव फंदे से उतरे। उन्होंने पुलिस को भी सूचना नहीं दी। छोटी भांजी जो अस्पताल में भर्ती है, उसे भी ससुराल पक्ष ने ही फंदे से नीचे उतारा है।

नीरज ने बताया कि दीदी मायके आ जाती थी तो जीजा रजत यादव मरने की धमकी देते थे। कहते थे, लेने नहीं आ रहा हूं। ससुराल आ जाओ, नहीं आई तो एक्सीडेंट करके मर जाऊंगा। करंट लगा लूंगा। 4 मार्च को छोटी बहन की शादी थी। इस शादी में आए थे शराब पीकर, गदर किया था। रात में ही दीदी को लेकर गए थे। शादी के बाद सब लोगों ने मिलकर प्रताड़ित किया, इससे दुखी होकर दीदी ने अपने बच्चियों के सहित फांसी लगा ली।

परिजन ने आरोप लगाया है कि संगीता जब फांसी के फंदे पर लटकी मिली तब उसकी पीठ पर एक लेटर चिपका था। ये सुसाइड नोट था, जिसमें उसने लिखा है- उसके पेट में एक गठान है। इस वजह से अब आगे बच्चे नहीं पैदा कर सकती। परिवार वालों को पुत्र नहीं दे सकती, इसलिए मैं ऐसा करने जा रही हूं। हालांकि, कुछ अन्य परिजन का कहना है कि कोई लेटर नहीं मिला है। वहीं, पुलिसकर्मियों की मानें तो घटनास्थल से एक लेटर बरामद हुआ है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।