ललितपुर।सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि आगामी त्यौहार ईद, नवरात्रि, महावीर जयंती, हनुमान जयंती आदि पर्वों को दृष्टिगत रखते हुए समस्त पशु पालक अपने-अपने पशुओं को सड़कों पर न छोड़े एवं सड़कों के किनारे न बांधे,

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ललितपुर।आवारा पशुओं के सड़क पर बैठने एवं सड़क किनारे बांधे जाने से आवागमन बाधित होता है, वहीं आवारा पशुओं द्वारा सड़कों पर गंदगी भी फैलाई जाती है, जिससे आम नागरिकों को काफी समस्या उत्पन्न होती है एवं सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के चलते दुर्घटनाएं होती है।

अतः समस्त पशु पालकों से अनुरोध है कि वह अपने-अपने पशु सड़कों पर न छोड़े, यदि सड़कों पर आवारा पशु/सड़क की पटरी पर बंधे हुए पाये जाते है, तो जुर्माना/नगर पालिका द्वारा अपने संरक्षण में गौवंश को लेते हुए दैलवारा स्थित कान्हा आश्रय स्थल में संरक्षित किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी पशु पालकों की होगी।

अधिशाषी अधिकारी
नगर पालिका परिषद, ललितपुर

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।