कुर्सी शिवराज की, कटघरे में मोहन सरकार ! शिवराज समर्थक पूर्व विधायक महेश राय और उनकी टीम की चुप्पी कब तक ?

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भाजपा नेता रतन यादव की शिवराज विरोधी टिप्पणी से सियासत गर्म

      बीना की राजनीति में कभी संगठन की कमान संभालने वाले, कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले और लगातार सरपंच रहे बुजुर्ग नेता रतन यादव की एक फेसबुक पोस्ट ने इन दिनों सियासी गलियारों में नया सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ शिवराज सिंह चौहान को लेकर की गई टिप्पणी का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक व्यवस्था का है, जिसमें कल तक सत्ता के साथ खड़े दिखाई देने वाले चेहरे आज उसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

      ये वही रतन यादव हैं जो तात्कालीन विधायक महेश राय की गोद में बैठकर स्वयं और अपने परिजनों को विभिन्न पदों पर बैठाकर शिवराज सरकार के गुणगान किया करते थे। इन दिनों यादव बनाम भाजपा की नई नीति प्रदेश की राजनीति में चल रही है। बीते दिवस रतन यादव ने अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। उन्होंने किसानों की बर्बाद फसल, खाद की किल्लत, गेहूं की तुलाई के समय बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान जैसे मुद्दे उठाए। साथ ही गरीब आदिवासियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए।

असली सवाल निशाना शिवराज पर या मोहन सरकार पर ?

शिवराज सिंह चौहान अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि केंद्र में कृषि मंत्री हैं। प्रदेश की सरकार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कंधों पर है। ऐसे में प्रदेश की कृषि व्यवस्था, किसानों को खाद की उपलब्धता और राज्य सरकार की प्रशासनिक तैयारियों को लेकर जवाबदेही तय करते समय पद और जिम्मेदारी का फर्क समझना भी जरूरी है। किसानों के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री से सवाल पूछना भी उतना ही जायज है। आखिर केंद्र और राज्य, दोनों की नीतियों का असर खेत और किसान तक पहुँचता है। लेकिन सवाल पूछने का पैमाना एक ही होना चाहिए- चाहे कुर्सी पर अपना नेता हो या विरोधी दल का।

शिवराज समर्थक पूर्व विधायक और उनके सिपेहसालार शांत क्यों ?

बीना की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि स्थानीय भाजपा नेताओं की आवाज केवल र फेसबुक की पोस्ट नहीं होती; कई बार वह संगठन के भीतर की बेचैनी और जनता के बीच पनप रहे असंतोष का संकेत भी बन जाती है। विधायक निर्मला सप्रे के खास सिपेहसालारों में गिने जाने वाले रतन यादव का शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध इस तरह लिखना क्या विधायक के भावी राजनैतिक कैरियर को हानि नहीं पहुंचाएगी। फिलहाल शिवराज समर्थक पूर्व विधायक महेश राय और उनके इर्द-गिर्द रहने वाले सिपेहसालार शिवराज सिंह चौहान पर बीना स्तर के नेता द्वारा इस प्रकार कोसने को लेकर फिलहाल चुप्पी बना रखी है। अब देखना यह है कि रतन यादव की यह पोस्ट सियासी हलचल बनकर रह जाती है या बीना में शिवराज सिंह के समर्थकों द्वारा इसका किसी प्रकार से कोई विद्रोह भी शुरू होता है। सियासत में बयान बहुत हैं, मगर शिवराज समर्थकों को राहत देने वाला जवाब कौन देता है? इसका इंतजार है।

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