न गैस एजेंसी का लाइसेंस, न गोदाम की स्वीकृति, फिर भी भंडारण किए थे 150 कॉमर्शियल गैस सिलेण्डर2850 किलो (2.85 मीट्रिक टन) गैस से हो सकता पूरा बीना बर्बाद

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धर्मेन्द्र उर्फ गुड्डन अग्रवाल और उनके साले ने बीना को बिठा दिया था बारुद के ढेर पर

      बीना के सुप्रसिद्ध बड़े किसान और व्यवसायी के रूप में स्थापित धर्मेन्द्र उर्फ गुड्डन अग्रवाल की एक छोटी सी गलती और अवैध रूप से किए गए लगभग 150 से अधिक कॉमर्शियल गैस सिलेण्डर जिनमें लगभग 2850 किलो (2.85 मीट्रिक टन) एलपीजी का भंडारण अवैध तरीके से कृषि मंडी के नजदीक और साहनी पेट्रोल पंप के सामने किए जाने का मामला अब गंभीर बनता जा रहा है। प्रदेश में लगातार आगजनी की बड़ी घटनाओं के बाद भी बीना के गुड्डन अग्रवाल द्वारा सागर की अधिकृत बीपीसीएल गैस एजेंसी से 150 कॉमर्शियल सिलेण्डर बीना रिफाइनरी में सप्लाई करने के लिए भण्डारण किए गए। वह भी ऐसे संवेदनशील स्थानों पर जहां पेट्रोल पंप और कृषि मंडी की दूरी कुछ ही मीटर की है। यदि कोई लापरवाही होती तो इन सिलेण्डरों में मौजूद 2.85 मीट्रिक टन गैस से पूरा बीना आग की लपेट में आकर बर्बाद हो सकता था। मामले को साधारण बताकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है, प्रशासन की भी मंशा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्रिय दिखाई नहीं दे रही है। गौरतलब है कि संबंधित व्यक्ति के पास न तो (क्कश्वस्ह्र) पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन का लाइसेंस था, न ही गैस सिलेण्डर अधिनियम 2016 के नियम 43 के तहत कोई लाइसेंस।
बीना (टीएमई न्यूज)। बीना में आपूर्ति विभाग ने कृषि उपज मंडी के पास साहनी पेट्रोल पंप के सामने स्थित धर्मेंद्र अग्रवाल के गोदाम और मकान से 150 कमर्शियल गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। इनकी कीमत 7 लाख 81 हजार 500 रुपए है। विभाग ने सिलेंडर रखने के नियमों के उल्लंघन पर मामला दर्ज किया है।
19 और 5 किलो क्षमता के सिलेंडर मिले
सहायक आपूर्ति अधिकारी राजेश पटेल ने बताया कि जांच के दौरान गोदाम और मकान में बीपीसीएल कंपनी के 19 किलो और 5 किलो क्षमता वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर मिले। विभाग ने सभी 150 सिलेंडर जब्त कर लिए हैं।
सागर की एजेंसी से मंगाए गए थे सिलेंडर
शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये सिलेंडर सागर की सर्वश्रेष्ठ गैस एजेंसी से मेसर्स अग्रवाल ट्रेडर्स ने मंगाए थे। इनकी सप्लाई बीना रिफाइनरी में होनी थी।
नियमों के तहत दर्ज किया मामला
गोदाम में सिलेंडर रखने के नियमों का उल्लंघन मिलने पर आपूर्ति विभाग ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई और वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के तहत मामला दर्ज किया है। जब्त सिलेंडरों के मामले में अब नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इन कानूनों और धाराओं के तहत होना चाहिए कार्रवाई –
यदि गैस एजेंसी का लाइसेंस भी जारी नहीं हुआ है और गोदाम को भी स्वीकृति नहीं मिली है तो गैस सिलेण्डर रूल 2016 के नियम 43 के तहत बिना आवश्यक लाइसेंस भरे सिलेण्डर रखने एक्सप्लोसिव एक्ट 1884 की धारा 98 के अनुसार लागू नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई, एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 तथा एसेंशल कमोडिटी एक्ट 1955 की धारा 3 और 7 के अनुसार अनाधिकृत भंडारण आपूर्ति या वितरण से संबंधित आदेश का उल्लंघन का मामला बनता है।
इन नियमों और धाराओं के तहत मामले की हो पूरी जांच
गैस सिलेण्डर अधिनियम 2016 के नियम 43, नियम 47 से 50, एक्सप्लोसिव एक्ट एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर के खंड 3 और 4 तथा एसेंशल कमोडिटी एक्ट की धारा 3 और 7 के तहत इस पूरे मामले में जांच के आधार के तौर पर आवश्यक लाइसेंस के बिना भरे सिलेण्डरों का कब्जा या भंडारण, गोदाम की योजना स्वीकृति और लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया की जांच लाइसेंस पूर्व बड़ी मात्रा में सिलेण्डरों के भंडारण की जांच, इन पर लागू दंडात्मक प्रावधान, अनाधिकृत आपूर्ति और परिवहन से जुड़े उल्लंघनों की जांच एवं लागू नियंत्रण आदेश के उल्लंघन के ्रप्रमाण मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकतम 100 किलो गैस या 6 सिलेण्डर ही रखे जा सकते हैं
गैस सिलेण्डर नियम 2016 की धारा 44 सी के अनुसार अधिकतम 100 किलोग्राम की छूट दी गई है, इसका अर्थ यह नहीं कि 100 सिलेण्डर हों, कुल सिलेण्डरों में गैस की मात्रा 100 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए यानि अधिकतम 5 या 6 कॉमर्शियल सिलेण्डर ही रखे जा सकते हैं। इसके साथ ही बीएनएस भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 एवं 288 के तहत आग, विस्फोट या लोगों की सुरक्षा के खतरे को देखते हुए और लोगों की जान जोखिम में डालने की लिए कथित लापरवाही किए जाने पर पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है।
कौन करेगा कार्रवाई, शिकायत कहां दर्ज होना चाहिए
बड़ी मात्रा में कॉमर्शियल सिलेण्डरों का भंडारण एक गंभीर अपराध का विषय है जिसमें सबसे पहले क्कश्वस्ह्र ही गैस सिलेण्डारों के भंडारण से जुड़े केन्द्रीय सुरक्षा नियमों के प्रशासन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
इस प्रकार के मामले में तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के साथ निम्न अधिकारियों को शिकायत दी जा सकती है –
जिला कलेक्टर एवं जिला प्रशासन — गोदाम की अनुमति, स्थानीय स्वीकृतियों और सार्वजनिक सुरक्षा की जांच के लिए।
पुलिस अधीक्षक या संबंधित थाना प्रभारी — संभावित आपराधिक उल्लंघनों की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए।
क्कश्वस्ह्र के संबंधित कार्यालय — गोदाम के लाइसेंस, स्वीकृत क्षमता और गैस सिलेंडर नियमों के उल्लंघन की तकनीकी जांच के लिए।
संबंधित तेल विपणन कंपनी — यह जांचने के लिए कि सिलेंडर किस एजेंसी को आवंटित हुए, स्टॉक कहां रखने की अनुमति थी और वितरण नियमों का पालन हुआ या नहीं।
जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी — रुक्कत्र वितरण व्यवस्था या लागू नियंत्रण आदेश के उल्लंघन की जांच के लिए।
कुल मिलाकर बीना रिफाइनरी से अतिरिक्त लाभ कमाने के लिए संबंधित व्यक्ति धर्मेन्द्र उर्फ गुड्डन अग्रवाल द्वारा जिस तरह से गैस सिलेण्डरों का अवैध व्यापार किया जा रहा था उसे देखकर लगता है कि शहर की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर उन्हें कोई भय या डर नहीं था गौरतलब है कि गुड्डन अग्रवाल शहर के रसूखदार व्यक्ति हैं, बीना के कई पूर्व विधायकों, वर्तमान जनप्रतिनिधियों, पूर्व मंत्रियों सहित विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं से इनके मधुर संबंध हैं। लिहाजा कार्रवाई कितनी कड़ी होगी, होगी या नहीं होगी इस विषय में अभी कुछ भी लिखना बेमानी होगा।

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