झबुआ ।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आरबीएल बैंक में सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा महिला कर्मियों का किया सम्मान

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झबुआ ।केक काटकर महिला दिवस मनातीं महिलाएं  आरबीएल बैंक ने अंतरराष्ट्रीय महि ला दिवस पर महिला बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स के योगदान का किया सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आरबीएल  बैंक ने वित्तीय समावेशन में महिला बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित किया। बैंक द्वारा झाबुआ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की बेहतरीन महिला बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स को सम्मानित किया गया। जिन्होंने बैंकिंग सेवाओं को दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। जीएलओ मेडम कृतिका मैम जीएलओ शिवानी मैम और बीओई नीलम मेम  एरिया मैनेजर अमजद खान शाखा प्रबंधक श्रवण शिंदे एवं सहायक शाखा प्रबंधक संजय गुर्जर एवं आरबीएल finserve झाबुआ शाखा सभी जीएलओ सर

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।