चुनाव रद्द होने पर पुन: मतदान संभव
मध्यप्रदेश में राज्यसभा सांसदों तरुण चुघ, महेश केवट और रजनीश अग्रवाल के निर्विरोध चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने तीनों राज्यसभा सांसदों को नोटिस जारी किए हैं। यह नोटिस नामांकन रद्द करने के फैसले को गलत बताने संबंधी याचिका के विरुद्ध जारी किए गए हैं। चुनाव रद्द होने पर पुन: मतदान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की इस प्रक्रिया के चलते मध्यप्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गौरतलब है कि हाल ही में राज्यसभा सांसद महेश केवट के नामांकन में सरकारी भूमि को निजी भूमि बताने का मामला भी सामने आया है वहीं कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
भोपाल (टीएमई न्यूज)। बांकीपुर और दतिया उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद एक बार फिर मध्यप्रदेश भाजपा में हाईकोर्ट के एक निर्णय से खलबली मची हुई है। भाजपा का संकट मध्यप्रदेश में समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के तीन राज्यसभा सांसदों को हाईकोर्ट के नोटिस जारी होने के बाद पुन: मतदान की संभावना बढ़ गई है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश से निर्विरोध चुने गए भाजपा के तीन राज्यसभा सांसदों महेश केवट, तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को जबलपुर हाईकोर्ट ने नोटिस भेजे गए हैं। मामला मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने से जुड़ा है। याचिका में नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इन तीनों सांसदों का निर्वाचन निर्विरोध घोषित किया गया था। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से भी इस विषय में जबाव मांगा है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 11 सितंबर तक का समय दिया है। यदि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया और फैसला गलत पाई जाती है तो चुनाव प्रभावित माना जाएगा, ऐसी स्थिति में राज्यसभा निर्वाचन शून्य घोषित होने की संभावना जताई गई है। इस मामले ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
याचिका महेश केवट के खिलाफ, रजनीश और तरुण लपेटे में
न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकल पीठ ने मंगलवार को मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर इलेक्शन पिटीशन पर प्रारंभिक सुनवाई की। नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने पक्ष रखा। याचिका में तर्क दिया गया है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन अनुचित आधार पर रद्द किया गया था, इसमें भाजपा के निर्वाचित उम्मीदवार महेश केवट के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की गई है। तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के निर्वाचन को याचिका में सीधी चुनौती नहीं दी गई है इसके बावजूद ने हाईकोर्ट ने इन दोनों को भी नोटिस जारी किया है क्योंकि चुनाव याचिका पर आने वाले अंतिम निर्णय का असर उनके निर्वाचन पर भी पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 100(1) सी में किसी नामांकन को गलत तरीके से खारिज किए जाने को चुनाव शून्य घोषित करने के आधारों में शामिल किया गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि तीनों सांसदों का निर्वाचन शून्य घोषित किया जाएगा। किसके निर्वाचन पर कितना असर होगा यह हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि नामांकन रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया था तब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत संबंधित हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन दायर करने को कहा था।










