गढ़ाकोटा ।संतोष रजक बने रजक समाज के अध्यक्ष 

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  गढ़ाकोटा। विवेकानंद वार्ड रजक धर्मशाला में  संतशिरोमणि गाडगे जी महराज की जन्म जयंती मनाने को  बैठक  का  की गई जिसमे   रजक समाज   की     समिति का गठन किया गया जिसमे समस्त रजक समाज के वरिष्ट   जन  एवं सर्वसंम्ती युवा संतोष रजक को रजक समाज का अध्यक्ष बने गये  जिसमें सभी  वरिष्ठ जन बुद्धिजीवी  युवा समाज  की उपस्थिति  रहे जिसमे विवेकानंद वार्ड के पार्षद इंद्रजीत सिंह राजपूत बैठक में समलित रहे और रजक समाज के लोगो ने अपनी समस्यें बताई  जिसमें संरक्षक मानक दादा कामता रजक कालूराम रजक लखन रजक रवि रजक बुध्दी रजक पिपरिया खुमान रजक उत्तम रजक सोनू रजक मुकेश रजक उमेश रजक घोघरा समाज के लोग उपस्थि रहे  समिती सदस्य उपध्याक्ष प्रदीप रजक कोषध्ययक्ष मुकेश रनगुवां सचिव जागेश रजक  सभी समाज के बंधुओं ने सुभकामनाऐ दी

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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