देवास ।सीएमएचओ डॉ बेक ने सिविल अस्पताल सोनकच्छ का किया औचक निरीक्षण

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देवास ।सिविल अस्पताल सोनकच्छ में निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित चिकित्सक और कर्मचारियों को कारण बताओं  नोटिस जारी करने  के निर्देश। सिविल अस्पताल सोनकच्छ के स्टोर प्रभारी को तत्काल हटाया गया सीएमएचओ बेक के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित 7 चिकित्सक सहित 19 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस होगे जारी

     देवास 08 फरवरी 2025/मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजनी  जेम्स बेक ने सिविल अस्पताल सोनकच्छ में उपचार के दौरान लापरवाही की जानकारी को तत्काल  संज्ञान में लेकर शनिवार को सोनकच्छ अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।  निरीक्षण के दौरान अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक और कर्मचारियों  के  ड्यूटी रोस्टर  अनुसार उपस्थिति  को देखा उनके कार्यों  के विभाजन की जानकारी ली  स्टोर (ओषिधि भण्डार) का निरीक्षण कर दवाइयों उपकरण सहित अन्य सामग्री की उपलब्धता की जानकारी ली और सीबीएमओ को आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही के निर्देश दिये।
           सीएमएचओ डॉ. बेक ने सिविल अस्पताल सोनकच्छ में  निरीक्षण किया बिना अवकाश स्वीकृति के अनुपस्थित डॉ संदीप भंडारी, डॉ नेहा  मेश्राम, डॉ लोकेंद्र नागर, डॉ रामराज परमार, आरबीएसके चिकित्सक डॉ अंबिका दुबे, बंधनपत्र चिकित्सक डॉ श्रुति दरक, डॉ प्राची नायक , लैब  टेक्नीशियन पंकज वर्मा, मलेरिया निरीक्षक मांगीलाल मंडलोई, बीईई अशोक खाकरिया, स्टोर  प्रभारी नरेंद्र कुमार  देशमुख ,डाटा एंट्री आपरेटर राजेश  जाधोन, ड्रेसर विजय राठौर, रामचरण हवेरिया, एएनएम कु रीना सांगते, नर्सिंग ऑफिसर मुस्कान  सोनी , सीमा  डेकवास, अरुण चैहान, आरकेएसके काउंसलर पिंकू नाथ,को  कारण  बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
         निरीक्षण  के दौरान स्टोर प्रभारी  नरेंद्र कुमार  देशमुख  बिना पूर्व अवकाश  स्वीकृति के 2 दिवस से अनुपस्थित पाए गए स्टोर में सामग्री उपकरण का सही  रख रखाव नही रखने और रिकॉर्ड अपडेट नही रखने पर  इनको कारण बताओ नोटिस जारी करने और स्टोर प्रभारी का चार्ज अन्य कर्मचारी को तत्काल देने के निर्देश दिए।
        सीएमएचओ बेक ने सीबीएमओ डॉ ओरिया को निर्देश दिए की ब्लॉक स्तरीय सभी स्वास्थ्य संस्थाओं का प्रतिमाह बीपीएम, बीसीएम, बीईई , लेखापाल और ब्लॉक स्टोर प्रभारी  द्वारा सयुक्त रूप टीम बनाकर निरीक्षण कर राज्य स्तर ,जिला स्टोर से प्रदाय दवाइयां, उपकरण और प्रचार प्रसार सामग्री  सहित अन्य  व्यवस्थाओं  की मॉनिटरिंग कर  प्रतिवेदन सीएमएचओ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही जिला स्तर की टीम भी प्रति तिमाही में ब्लॉक स्टोर का निरीक्षण करेगी।
          सीएमएचओ ने निर्देश दिए की ब्लॉक स्तरीय संस्थाओं में  आकस्मिक घटना के दौरान कोई चिकित्सक या कर्मचारी बिना पूर्व अवकाश स्वीकृत कराए अनुपस्थित पाया जाता है तो  अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी  सिविल अस्पताल में  घटना के दौरान अव्यवस्था और मरीजों से उपचार सामग्री  बाहर से मंगवाने की घटना अनुचित है इस पर सीबीएमओ और बीपीएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर मुख्यालय पर ही निवास करने के सख्त  निर्देश दिए भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव  वरिष्ठ कार्यालय को भेजकर कड़ी कार्यवाही की जावेगी।
       निर्माणाधीन नवीन भवन  का निरीक्षण किया निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों  को निर्देश दिए की जो भी कार्य  शेष है शीघ्र पूर्ण कर व्यवस्थित साफ सफाई करवाए और हस्तांतरण की कार्यवाही पूर्ण करे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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