देवास । भाजपा जिलाध्यक्ष को सहकारी कर्मचारियों ने मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, मिला आश्वासन

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देवास। मप्र सहकारी संस्थाएं कर्मचारी महासंघ के कर्मचारियों की हडताल शनिवार को चौथे दिन भी जारी रही। सभी जगह से थक हारने के बाद सहकारी कर्मचारी भाजपा जिला कार्यालय पहुंचे और जिलाध्यक्ष रायसिंह सेंधव को ज्ञापन दिया। महासंघ जिलाध्यक्ष ठा. जवालसिंह सेंधव ने बताया कि अपनी लम्बित मांगों को लेकर 5 मार्च से देवास जिले के करीबन 700 से अधिक सहकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हडताल कर रहे है। लेकिन जिला प्रशासन कुंभकरणीय निंद सोया हुआ है। हडताल से सहकारी समितियों में काम पूर्ण रूप से ठप्प पडे है। किसानों को खाद-बीज व अन्य जरूरी चीजों के लिए भटकना पड़ रहा है। सहकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। किसानों को खाद-बीज का वितरण बंद हो गया है। साथ ही केसीसी, ब्याज अनुदान, लोन की एंट्री आदि काम भी बंद हो गए हैं। हडताल के दौरान दो बार वार्ता भी हुई, लेकिन तालमेल न मिलने के कारण विफल रही। सहकारी कर्मचारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष श्री सेंधव को अपना मांग पत्र सौंपते हुए बताया कि शासन की ओर से जारी आदेशों के बावजूद कई जिलों में नियमित वेतन भुगतान नहीं हो रहा। 60 प्रतिशत पैक्स कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई। अक्टूबर 2023 से लागू 3000 रुपए वेतन वृद्धि का भुगतान अभी तक लंबित है। कोरोना काल में खाद्यान्न वितरण से जुड़ी गड़बडिय़ों के लिए कर्मचारियों पर की जा रही कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। कंप्यूटर ऑपरेटरों के स्थायीकरण किया जाए। संस्था में सहायक समिति प्रबंधक (कैडर भर्ती) के पद पर भर्ती किए जाने आदि अन्य मांगे शामिल है। भाजपा जिलाध्यक्ष श्री सेंधव ने आश्वासन दिया है कि वे कलेक्टर इस संबंध में बात करेंगे। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष इंदर सिंह गौड़, पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला, संगठन जिला सचिव बहादुर सिंह भाटी, संगठन जिला कमेटी के सदस्य धर्मेन्द्र सिंह चौबारा, जीवन सिंह गोस्वामी, देवेंद्र सेंधव, महेंद्र सिंह राजावत, जगदीश शर्मा, संतोष जोशी, विजय कुमार जोशी, राजा मीणा, मोहनलाल जाट, राजेश सिंह राजपूत आदि सहित बडी संख्या में सहकारी कर्मचारी उपस्थित थी। यह हडताल निरंतर रूप से जारी रहेगी।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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