पवई । को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर पवई क्षेत्र के नागरिक बागेश्वर धाम में प्रधानमंत्री को देंगे आवेदन 23 फरवरी को बागेश्वर धाम पहुंच रहे देश के प्रधानमंत्री

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पवई । को जिला बनाए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। जिसको लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति के द्वारा पूर्व में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष,प्रभारी मंत्री,पूर्व मुख्यमंत्री एवं पवई विधायक को आवेदन के माध्यम से मांग की जा चुकी है,कि पवई को जिला बनाया जाए।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि पवई विधानसभा 58 मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की सबसे बड़ी विधानसभा है। पवई विधानसभा अंतर्गत चार तहसील(शाहनगर,रैपुरा, पवई, सिमरिया)है और दो उप तहसील आती है,यदि गुनौर एवं अमानगंज तहसील को मिला दिया जाए,तो पवई को जिला बनाया जा सकता है। पवई पन्ना और कटनी के बीच का केंद्र बिंदु है जहां से 27 किलोमीटर गुनौर तो,वही अमानगंज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा सुगरहा ग्राम पंचायत जो पन्ना जिले की आखिरी ग्राम पंचायत, जो जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर है,इसी प्रकार रैपुरा तहसील की दूरी 100 किलोमीटर,श्यामगिरी कल्दा से 110 किलोमीटर ,मड़वा हरदुआ से भी 110 किलोमीटर है,यदि पन्ना जिले से पवई को अलगकर साथ ही गुनौर और अमानगंज को जोड़कर पवई को जिला बना दिया जाए तो इन सब की दूरी पवई के जिला बनने के बाद 35 से 40 किलोमीटर रह जाएगी। इसके साथ ही एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी जेके सीमेंट का प्लांट भी पवई विधानसभा अंतर्गत आता है,इसके साथ ही यहां पर्यटन को लेकर भी अपार संभावनाएं हैं,माता कलेही देवी मंदिर,प्राचीन सिद्ध स्थल हनुमान भाटे जहां वर्ष भर लगातार जिले ही नहीं बल्कि दूसरे जिलों अन्य प्रदेशों के लोग भी यहां दर्शन करने एवं पर्यटन के लिए आते हैं। यदि पवई को जिला बनाया जाता है,तो ऐसे में इस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा,लोगों को रोजगार मिलेगा, साथ ही लोगों के आवश्यक कार्यों के लिए आने जाने में पैसे एवं समय की भी बचत होगी। नागरिकों ने कहा कि जब छोटी-छोटी एक दो तहसीलों को जोड़कर मैहर, मऊगंज, निवाड़ी आदि को जिला बनाया जा सकता है, तो फिर पवई को जिला क्यों नहीं बनाया जा सकता।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।