भोपाल ।फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता में मीडिया की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली – राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया मध्य प्रदेश, डॉ. हिमांशु जायसवार

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भोपाल • फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम पर मीडिया सहयोगियों हेतु संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन
• 10 फरवरी से 9 जिलों के चिन्हित 23 विकास खण्डों में शुरू होगा फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन  

• 58,08,577 की आबादी में 52,85,805 लाभार्थियों को दवा सेवन का लक्ष्य

भोपाल (मध्य प्रदेश), 6 फरवरी 2025: मध्य प्रदेश सरकार फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रयास कर रही है। राज्य सरकार द्वारा, अन्तर्विभागीय समन्वय के साथ ही मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम में मीडिया सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सभागार में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज संस्था द्वारा मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।



इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह था कि, फाइलेरिया रोग की गंभीरता को मीडिया सहयोगियों के माध्यम से जन-समुदाय में अधिक से अधिक प्रचारित- प्रसारित  किया जा सके जिससे, लोग इस गंभीर बीमारी के बारे में सही और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकें और इस रोग से स्वयं और अपने परिवार को बचा सकें।


इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, मध्य प्रदेश डॉ. हिमांशु जायसवार ने बताया कि राज्य में आगामी 10 फरवरी से 25 फरवरी तक 9 जिलों के 23 चिन्हित विकासखण्डों  की 58,08,577 की आबादी में से 52,85,805 लाभार्थियों को प्रशिक्षित दवा सेवकों के माध्यम से बूथ डे एवं घर- घर भ्रमण के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन समस्त पात्र हितग्राहियों को कराया जाएगा। एमडीए अंतर्गत डी.ए. अर्थात् डाय ईथाइल कार्बामैज़िन सीट्रेट (डीईसी) और अल्बेंडाजोल का सेवन शहडोल, दतिया एवं निवाड़ी में और आई.डी.ए अर्थात् ट्रिपल ड्रग – डी.ई.सी, एल्बेण्डाज़ोल एवं आइवरमेक्टिन का सेवन जिला- मउगंज, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, कटनी और उमरिया में कराया जाएगा।


ये दवायें पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को छोड़कर, सभी को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्य कर्मियों के सामने करना है। यह दवायें खाली पेट नहीं खानी हैं और एल्बेण्डाज़ोल दवा को चबा के खाना है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में राज्य में 3059 लिम्फेडिमा के और हाइड्रोसील के 1011 मामले दर्ज कर विभाग द्वारा उन्हें मोर्बिडिटी मैनेजमेंट एवं डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) कार्यक्रम  के अंतर्गत नि:शुल्क सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।


विश्व स्वास्थ्य संगठन के  राज्य एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. देवेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।



आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे; हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फोडेमा (अंगों की सूजन) व काइलुरिया (दूधिया सफेद पेशाब) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।


फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में एल्बेंडाजोल भी खिलाई जाती है जो बच्चों में होने वाली कृमि रोग का उपचार करता है और सीधे तौर पर बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास में सहायक होता है।


ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के सीनियर मैनेजर दीपक मिश्रा ने कहा कि इस रोग से पीड़ित व्यक्ति जीवन भर अपनी आजीविका कमाने में और दूसरे सामजिक कार्य करने में अक्षम होता जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि, सरकार द्वारा चलाये जा रहे हर कार्यक्रम में मीडिया सहयोगियों का उल्लेखनीय योगदान रहता है, और इनके माध्यम से लोगों तक सही और महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचती है।


उन्होंने उपस्थित मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि फाइलेरिया जैसे गंभीर रोग से समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एम.डी.ए.) कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।
मीडिया सहयोगियों के साथ प्रश्न-उत्तर सत्र भी संपन्न किया गया। इस सत्र में इस बात पर भी चर्चा की गयी कि फाइलेरिया के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। मीडिया सहयोगियों से यह भी अनुरोध किया गया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय दृष्टिकोण से दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करने से समुदाय को इस रोग की गंभीरता देखकर, स्वयं को और अपने परिवार को इससे सुरक्षित रखने की प्रेरणा मिलेगी।



कार्यशाला में इस अवसर पर स्थानीय मीडिया के अतिरिक्त राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ही सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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