
सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में सामने आए एक गंभीर मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में भर्ती एक मरीज चार दिन तक लापता रहा, लेकिन न तो उसकी गंभीरता से तलाश की गई और न ही वार्ड स्तर पर समय रहते स्थिति स्पष्ट हो सकी। बाद में मरीज का शव वार्ड के स्टोर रूम से बरामद हुआ। इस दौरान डॉक्टर नियमित रूप से मरीज की केस शीट पर उपचार संबंधी टिप्पणियां दर्ज करते रहे। �
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जानकारी के अनुसार, शव मिलने के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मरीज कई दिनों से वार्ड से गायब था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रभावी खोजबीन नहीं की गई। मामले के उजागर होने के बाद केवल सफाई सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि डॉक्टरों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। �
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अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस भी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, मरीजों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। �
Amar Ujala
टुडे एमपी एक्सप्रेस की नजर:
यह मामला केवल एक मरीज की मौत का नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था, जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि एक भर्ती मरीज कई दिनों तक लापता रहे और किसी को इसकी जानकारी न हो, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।








