तेंदूखेड़ा/यह विधेयक रेलवे के प्रशासनिक ढांचे बनाएगा आधुनिक सांसद दर्शन सिंह चौधरी

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तेंदूखेड़ा/लोकसभा के शीतकालीन सत्र में केन्द्र सरकार ने रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया। केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश किया। जो कि 1905 के रेलवे विधेयक एवं 1989 के रेलवे विधेयक को एकीकृत करेगा। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पिछले 10 सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे के बजट में कई गुना का इजाफा किया है। होशंगाबाद नरसिंहपुर लोकसभा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने विधेयक पर चर्चा करते हुए विधेयक का समर्थन किया। विपक्षियों पर पलटवार करते हुए सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि भारतीय रेलवे के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने में यह विधेयक मील का पत्थर साबित होगा। मैं रेलवे विधेयक 2024 का पुरजोर तरीके से समर्थन करता हूं। माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय रेल मंत्री जी का धन्यवाद देता हूं।  श्री चौधरी ने अकाऊआ से हाथी नहीं बंधते,  आंखें इनकी पथरागयी है , ओंगना के बिना गाड़ी ढुडकत नैहा  जैसी देसी कहावतों का जिक्र किया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।