देवरी।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जय अंबे इमरजेंसी एम्बुलेंस सर्विस को मध्य प्रदेश में ठेका है पर ठेकेदार के पायलेटों द्वारा की जा रही संचालित फर्जी आईडी लेकर एम्बुलेंस

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देवरी ।ठेकेदार एवं एच आर हेड जिला मैनेजर सहित अन्य की मिली भगत से मध्य प्रदेश सरकार को लगाया जा रहा करोड़ों रुपये का चूना , हो रहे हैं फर्जी बिलों का भुगतान


108 एंबुलेंस गाड़ी नंबर सीजी 04 एन
डब्लू  8741. के पायलट द्वारा दौड़ाई जा रही है फर्जी केस आईडी लेकर 108 एम्बुलेंस

मध्य प्रदेश के भोपाल से संचालित 108 एम्बुलेंस के प्रदेश हेड एच आर 108 सेवा अधिकारी सागर कृष्णा गौर एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी तरुण सिंह परिहार 
जिला मैनेजरों को कराया अवगत

फिर भी नहीं हो रही है 108 एम्बुलेंस फर्जी केस चलाने वाले पायलटों पर कार्रवाई
इन सभी अधिकारियों की मिलीभगत से चल रही है फर्जी केस वाली 108 एम्बुलेंस

मुनाफा के लिए जान का सौदा रीडिंग बढ़ाने के लिए ड्राइवर बिना मरीज के दौड़ा रहे 108 एम्बुलेंस

कि.मी के हिसाब से भुगतान रोज 400 किलोमीटर से कम दौड़ाओ तो नौकरी वेतन पर संकट

सड़क हादसों में समय से मिलती नहीं एम्बुलेंस इंतजार करते-करते मरीज़ दम तोड़ रहे


108 इमरजेंसी सेवा कॉल सेंटर बना टाइम पास का अड्डा 108 एम्बुलेंस निशुल्क सुविधा के पायलटों के द्वारा फर्जी आईडी केस बनाकर दौड़ाई जाती हैं 400 किलोमीटर नहीं हो पाती जरुरतमंदों की ‘मदद’


सागर ।मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही 108 निशुल्क सेवा एम्बुलेंस का टेंडर मध्यप्रदेश में जय अंबे इमरजेंसी एंबुलेंस सर्विसिंग कंपनी को दिया गया है और निशुल्क एंबुलेंस सुविधा संचालित की जा रही है लेकिन मध्य प्रदेश के सागर जिले में 8
फरवरी को मध्यप्रदेश के सागर से आई 108 एम्बुलेंस जो कि फर्जी तरीके से पायलट द्वारा फर्जी आईडी लेकर मुनाफा के लिए जान का सौदा रीडिंग बढ़ाने के लिए ड्राइवर बिना मरीज के दौड़ा रहे 108 एम्बुलेंस ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस कंपनी और ड्राइवर मुनाफा के लिए मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ।कि.मी बढ़ाने की लालच में एम्बुलेंस के पायलट द्वारा फर्जी आईडी लेकर बगैर कोई मरीज के दौड़ाई जा रही है 108 एम्बुलेंस
के पायलट एवं भोपाल से लेकर सागर नरसिंहपुर के 108 के अधिकारियों की मिलीभगत से मरीजों के नाम पर फर्जी आईडी लेकर एंबुलेंस कंपनी और कंपनी में बैठे अधिकारियों और ड्राइवरों द्वारा मुनाफा के लिए मरीजों की जान से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं ड्राइवर का कहना है कि यदि एंबुलेंस रोज 400 किलोमीटर से कम दौड़ाओ तो नौकरी और वेतन पर संकट हो जाएगा इसके लिए 108 एंबुलेंस पायलटों को अधिकारियों द्वारा धमकाया भी जाता है  आपको बता दें कि जब इस संबंध में सागर जिले में वेंडर से बात की तो बोला कि आप लोग अखबारों में छाप दो उससे कुछ नहीं होता । जब इस प्रकार से 108 सेवा संचालित की जाएगी तो फिर मरीजों के लिए 108 सेवा कैसे मुहैया हो सकेगी ।

इनका कहना ।

हम इस मामले की जांच करेंगे और अगर इस प्रकार से किसी भी केस में एंबुलेंस को फर्जी केस लेकर भेजा गया है तो हम निश्चित रूप से इस पर कार्यवाही करेंगे कंपनी इस प्रकार की किसी भी अनैतिक गतिविधि का समर्थन नहीं करती है कंपनी का लक्ष्य लोगों को बेहतर सुविधा मुहैया करना है।
तरुण सिंह परिहार
मीडिया प्रभारी 108 सेवा भोपाल

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।