बीना।विधायक निर्मला सप्रे की पहल पर बीना-कंजिया-देहरी की 4 किमी रोड स्वीकृत

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बीना ।विधायक निर्मला सप्रे की पहल पर बीना-कंजिया-देहरी की 4 किमी रोड स्वीकृत* विधायक के पत्र के बाद एमपीआरडीसी ने 2 करोड़ 45 लाख लागत की सडक़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी
विधायक एडवोकेट श्रीमति निर्मला सप्रे बीना विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास एवं ग्रामीण क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सडक़ों से होने वाली परेशानियों और दुर्घटनाओं से निजात दिलाने के लिए बीड़ा उठा चुकी हैं। मप्र शासन विधायक निर्मला सप्रे के द्वारा की गई प्रत्येक विकास संबंधी मांग को प्राथमिकता से पूरी कर रहा है। इसी तारतम्य में विधायक द्वारा एमपीआरडीसी को पत्र क्र. बीव्हीएस/ऑफिस/2024/212 दिनांक 13 जुलाई को पत्र लिखकर बीना-कंजिया से देहरी रोड के उन्नयन कार्य की मांग की थी। जिसे प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कर दिया गया है।
बीना। मप्र शासन एवं डॉ. मोहन यादव की सरकार के माध्यम से विधायक निर्मला सप्रे लगातार बीना विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए कई योजनाएं एवं सडक़ों के निर्माण हेतु स्वीकृति ला रही हैं। बीते लगभग एक माह से विकास यात्राओं के माध्यम से करोड़ों रुपए के विकास कार्यों को मूर्त रूप देने के लिए भूमिपूजन उनके द्वारा लगातार किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि बीना-कंजिया रोड से देहरी रोड जो कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अंतर्गत बना था वह बीना कोटा-रेलवे लाइन के दोहरीकरण एवं बीना झांसी रेलवे लाइन के तिहरीकरण का कार्य होने के कारण भारी वाहनों के परिवहन द्वारा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। यहां ग्रामीणों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था जिसके लिए विधायक निर्मला सप्रे ने 13 जुलाई को मप्र ग्रामीण सडक़ विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इस सडक़ के निर्माण की मांग संबंधी पत्र भेजा था। अपने मांग पत्र में उन्होंने ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए साथ ही आस-पास के दर्जन भर ग्रामों के लोगों को सुलभ बनाने हेतु इस सडक़ के उन्नयन की मांग की थी। विधायक ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा करके यह सडक़ शीघ्र बनाए जाने की मांग रखी थी जिसे स्वीकृत करते हुए एमपीआरडीसी ने अपने पत्र क्रमांक 15169/22/बी12/ग्रास.प्रा./मिन्ट यू.पी.जी. / 497 दिनांक 17/12/24 के अनुसार उक्त बीना कंजिया से देहरी सडक़ निर्माण को प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है। यह सडक़ बीना विधानसभा के लिए पैकेज क्रमांक एमपी 33 यूपीजी 027 की राशि 2 करोड़ 44 लाख 60 हजार रुपए की लागत से बनाई जाएगी। कुल 3.88 किलोमीटर की इस सडक़ से आवागमन सुलभ होगा और लगभग दर्जन भर से अधिक गांव के निवासियों को इसका लाभ मिलेगा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।